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ख़बरों में सिर्फ हेमा मालिनी ! क्या सिर्फ वीआईपी और सेलीब्रिटी ही हैं ख़बर ?

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ख़बरों में सिर्फ अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी है, ट्विटर पर हेमा मालिनी ट्रेंड कर रही है। लेकिन तेज रफ्तार दौड़ती हेमा मालिनी की मर्सडीज से जिस माता-पिता ने अपनी बच्ची को खोया उनकी चिंता किसी को नहीं है। इतनी ख़बर जरूर है कि ऑल्टो कार में सवार एक बच्ची की इस हादसे में मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए। लेकिन वो लोग कहां है, उनकी सेहत कैसी है. ये जानने की फुर्सत किसी के पास नहीं है।

हेमा मालिनी को कितनी चोट लगी, कहां कहां चोट लगी ? उनकी कितनी जांच हुई, कहां कहां दर्द हो रहा है, कितना दर्द हो रहा है ? हर ख़बर टीवी पर है लेकिन नहीं है तो इस हादसे का दूसरा पक्ष। दूसरी गाड़ी में सवार वो घायल, जिन्हें भी चोट लगी है। कुछ को शायद हेमा मालिनी से भी ज्यादा लेकिन वो पिक्चर से गायब हैं, इसे उनका दुर्भाग्य कहेंगे कि वे वीआईपी नहीं है।

हेमा मालिनी की सेहत को लेकर अस्पताल बकायदा मेडिकल बुलेटिन भी जारी करता है। हेमा मालिनी की सेहत की हर एक ख़बर का अपडेट दिया जा रहा है लेकिन अपडेट गायब है तो उस परिवार का जिसने इस हादसे में अपने कलेजे के टुकड़े को खो दिया।

कथित तौर पर डेढ़ सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही हेमा मालिनी की मर्सडीज के ड्राईवर को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन सवाल बरकरार है कि क्या वीआईपी के लिए हिंदुस्तान में कोई कानून नहीं है ? सेलीब्रिटी और तेज रफ्तार के कहर की कहानियां हमारे देश में नई नहीं है। इस कहानी में एक और अध्याय जुड़ गया हेमा मालिनी की मर्सडीज से हुए इस हादसे का।

ये कहानी और भी दर्दनाक उस वक्त हो जाती हैं, जब हादसे के बाद कथित वीआईपी, सेलीब्रिटी वहां से खामोशी से निकल जाते हैं। हादसे में हुए घायलों की सुध लेने तक की फुर्सत उनके पास नहीं होती।

जैसी की ख़बर है कि इस हादसे के बाद हेमा मालिनी ने भी इस दस्तूर को निभाया और दूसरे घायलों को उनके हाल पर छोड़ अपने ईलाज की चिंता में चुपचाप वहां से निकल गई। ठीक है चोट ड्रीम गर्ल को भी लगी थी, लेकिन उनकी गाड़ी से हादसे के बाद क्या उन्हें घायलों की सुध नहीं लेनी चाहिए थी ? इसका जवाब तो हेमा मालिनी ही बेहतर दे सकती हैं।

हादसे में जो बच्ची इस दुनिया को छोड़ गई, वो तो कभी लौट कर नहीं आएगी, लेकिन सवाल ये है कि क्या अब भी रफ्तार के कहर को रोकने के लिए हमारी सरकार कुछ ठोस कदम उठाएगी। साथ ही एक और सवाल कि क्या हमारे देश में ख़बर का मतलब सिर्फ वीआईपी और सेलीब्रिटी ही हैं, आम आदमी का क्या ?

deepaktiwari555@gmail.com



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atul61 के द्वारा
July 4, 2015

हाँ  इस देश में आम आदमी कुचले जाने के लिए ही है. उसके कुचले जाने की खबर से टीवी चैनल की टीआरपी नहीं बढती. यदि हेमा मालिनी जी का ड्राईवर नहीं होता तो कुछ ही घंटों में उसकी जमानत नहीं होती.सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए वी आयी पी या सलीब्रिटी  या उससे जुड़ा व्यक्ति जैसे ड्राईवर आदि होना योग्यता है


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