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ललित मोदी, ट्वीट और मीडिया !

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ललित मोदी, अब तो ये नाम सुनते-सुनते कान पकने लगे हैं। टीवी खोलो, अख़बार उठाओ बस हर तरफ सिर्फ और सिर्फ ललित मोदी ने ये ट्वीट किया, इसका नाम लिया, उसका नाम लिया, इसके अलावा और कुछ भी नहीं है।

ललित मोदी खुद लंदन में आराम फरमा रहा है, लेकिन भूचाल हिंदुस्तान में आया हुआ है। चाय पीते-पीते ललित मोदी ट्वीट कर रहा है और भारतीय मीडिया पागल हुआ जा रहा है। सीधी सी बात कहूं तो ललित मोदी जो चाह रहा है, वही भारतीय मीडिया में चल रहा है।

पहले सवालों में घिरी, अक्सर विवादों से परे रहने वाली सुषमा स्वराज। सुषमा की ललित मोदी को मदद की ख़बर से सुषमा स्वराज सवालों के घेरे में आती दिखाई दी, तो मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल में कुछ बड़ा खोजने की कोशिश कर रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को तो मानो राजनीतिक ऑक्सीजन मिल गई। सुषमा के बाद विवादों में घिरी धौलपुर की महारानी और वर्तमान में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। कांग्रेस आक्रमक थी और बीजेपी बैकफुट पर लेकिन अब ललित मोदी का ट्वीट आया कि उन्होंने गांधी परिवार से भी मुलाकात की थी। राबर्ट और प्रियंका वाड्रा से वे मिले थे। ट्वीट आने की देर थी, बैकफुट पर खड़ी बीजेपी अचानक से आक्रमक हो गई। सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे पर जवाब देने से बचने वाली भाजपा अब कांग्रेस से सवाल कर रही है।

ललित मोदी ट्वीट पर ट्वीट कर रहा है और सत्ता से गलियारों से विपक्ष तक छटपटा रहे हैं। कुछ समाचार चैनल 24 घंटे सिर्फ ललित मोदी के चक्कर में घनचक्कर बने हुए हैं। सवालों में घिरे नेताओं के पीछे साए की तरह लगे हुए हैं। हर एक सेकेंड की रिपोर्टिंग का बखान कर रहे हैं। हमने ये खुलासा किया, हमने ये दिखाया। साथ ही इस इंतजार में हैं कि अब किसी का इस्तीफा हो तो फिर ख़बर का असर दिखाया जाए कि कैसे उनकी ख़बर ने दिग्गजों को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया !

नैतिकता के तकाजे पर इस्तीफा अब पुरानी बात हो गई है। वैसे भी सत्ता का नशा इतनी आसानी से तो नहीं उतरता ! ऐसे में कैसे हाथ आई कुर्सी को कोई कैसे छोड़ दे ? इसके लिए जरूरत होती है साहस की, जो आजकल के राजनेताओं में तो दिखने से रहा।

मतलब साफ है सुषमा और राजे के इस्तीफे के इंतजार में अपनी रात काली कर रहे लोगों को कुछ हासिल नहीं होने वाला। इस्तीफा, वो भी ऐसे वक्त में जब बिहार का विधानसभा चुनाव सामने खड़ा है। अब क्यों बिहार का किला फतह करने की आस लगाए बैठी भाजपा बैठे बिठाए अपने विरोधियों को निशाना साधने का मौका देगी ?

deepaktiwari555@gmail.com



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atul61 के द्वारा
July 3, 2015

साहस होता है नैतिकता में, यहाँ तो सत्ता से चिपकने  या फिर चिपके रहने के लिए बयाँ बाजी होती रहती है और ललित मोदी राज नेताओं को कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ा कर अपने बचने का रास्ता तलाश रहा है. मीडिया हो हल्ला करके पैसे बना रही है जब चेनेल की टीआरपी बढ़ेगी तभी ज्यादा विज्ञापन मिलेंगे. विज्ञापन दिखाने पर चैनल की आमदनी बढेगी.विज्ञापन लोक प्रिय होने पर उतपाद बिकेगा. दोनों तरफ से उपभोक्ता की ही जेब कटती है मेरे भाई.अब सवाल इतना है क्या मोदी जी भ्रस्टाचार ख़त्म करने का सपना पूरा कर पाएंगे इस गंदे माहोल में . क्या मोदी जी तुष्टीकरण की नीति से बहार आ पाएंगे


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