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"पावर" के लिए बेचैन पवार !

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गजब है भाई, ऐसे बेचैनी देखी है कभी, हालांकि राजनीति में कुछ भी संभव है, लेकिन महाराष्ट्र में चुनावी नतीजों के बाद से ही एनसीपी का भाजपा के प्रति बढ़ता प्रेम निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। ध्यान रहे कि ये वही एनसीपी है, जो चुनावी नतीजों से पहले भाजपा की धुर विरोधी हुआ करती थी, लेकिन जनता का फैसला क्या आया, शरद पवार साहब के तो सुर ही बदल गए।

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के पूरे नतीजे आने से पहले ही साफ हो चुकी चुनावी तस्वीर को भांपकर पहले तो एनसीपी ने खुद की भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया। वजह बताई, महाराष्ट्र में स्थाई सरकार के गठन में अपनी भूमिका निभाना, लेकिन पवार साहब ये भूल गए कि इसकी असल वजह क्या हो सकती है, जो अब तक फूटी आंख न सुहाने वाली भाजपा को सरकार बनाने के लिए आप बिना शर्त समर्थन को तैयार हो गए, वो भी बिन मांगे। अब जब एनसीपी को लगा कि भाजपा अपनी पुरानी सहयोगी शिवसेना के साथ जाना ज्यादा पसंद करेगी और शिवसेना का रूख भी भाजपा के लिए नरम पड़ने लगा है, तो शरद पवार साहब ने नया दांव खेल दिया। ऐलान कर दिया कि सदन में बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग की नौबत आती है, तो एनसीपी विधायक बॉयकॉट कर देंगे और वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे। मंशा शायद यही थी कि भाजपा को ये संदेश चला जाए कि शिवसेना के दबाव में जाने से भाजपा बचे और बहुमत साबित करने के संकट से उसे एनसीपी निकाल लेगी। अब एनसीपी अपने इस भाजपा प्रेम के पीछे की उस वजह से भले ही इंकार कर रही हो, जिसकी चर्चा सियासी गलियारों में तैर रही है, कि एनसीपी भाजपा के साथ खड़े होकर बदले में भाजपा से चाहती है, कि पिछली सरकार में हुए भ्रष्टाचार और घोटालों की जांच भाजपा सरकार न कराए।

राजनीतिज्ञ वो भी शरद पवार जैसा, जाहिर है बिना किसी वजह के तो भाजपा को समर्थन देने के लिए ललायित नहीं हो रहे होंगे, वजह चर्चाओं में भी है, और इस वजह से आसानी से इंकार भी नहीं किया जा सकता। बहरहाल एनसीपी भाजपा को ऑफर पर ऑफर दिए जा रही है, और भाजपा ने भी शिवसेना के साथ कोई बात नहीं बन पाई है, यानि की भाजपा ने विकल्प खुले रखे हैं। ऐसे में देखना रोचक होगा कि आखिर भाजपा सरकार बनाने के लिए क्या रास्ता अख्तियार करना पसंद करेगी। अपनी पुरानी सहयोगी शिवसेना के समर्थन से सरकार बनाएगी, जिसकी संभावना ज्यादा प्रबल है, या फिर एनसीपी के लुभावने ऑफरों पर गौर करेगी ! बहरहाल देवेन्द्र फडनवीस के रूप में मुख्यमंत्री के नाम का तो ऐलान हो गया है, और उम्मीद है कि जल्द ही सरकार गठन का फार्मूला भी सबके सामने आ जाएगा कि आखिर भाजपा किसे अपने साथ लेकर चलती है।

deepaktiwari555@gmail.com



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ravindra K Kapoor के द्वारा
November 1, 2014

अच्छा लेख है दीपकजी महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार की भूमिका बहुत से विवादों से घिरी है. ज्यादा अच्छा हो अगर बीजेपी शरद पवार जैसे नेता की जगह शिव सेना का ही साथ पकडे. सुभकामनाओं के साथ…रवीन्द्र के कपूर


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