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भारत रत्न पर सियासत क्यों ?

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भारत रत्न, भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, हर भारतीय इस सम्मान को पाना चाहेगा। लेकिन क्या हर भारतीय इसका हकदार है। जाहिर है नहीं, लेकिन भारत रत्न पर बीते कुछ सालों से हो रही सियासत के बीच अब ये सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन वास्तव में इस सम्मान का हकदार है..?

क्या केन्द्र की सत्ता में काबिज होने वाली सरकारें अपने दल से जुड़े लोगों को या फिर अपने सियासी फायदे के लिए इस सर्वोच्च भारतीय नागरिक सम्मान का मखौल तो नहीं उड़ा रही..?

क्यों केन्द्र सरकारें इस सम्मान को रेवड़ियों की तरह बांटकर इस सम्मान का मजाक बना रही हैं..?

हैरानी तो उस वक्त होती है, जैसा कि अमूमन देखा गया है कि इस सम्मान के लिए अधिकतर लोगों को मरणोपरांत चुना गया। केन्द्र में सरकार चाहे किसी की भी रही हो क्यों सरकारों को उस शख्सियत की देश के लिए दिए गए योगदान की कीमत उनकी मौत के बाद आती है। जीते जी उन्हें कोई नहीं पूछता लेकिन प्राण निकल जाने के बाद उन्हें सम्मान देने की होड़ सी लग जाती है।

1954 में इस सम्मान की स्थापना के बाद से अब तक 11 लोगों को मरणोपरांत भारत रत्न के लायक समझा गया। लाल बहादुर शास्त्री, के कामराज, आचार्य विनोबा भावे, मरूदुरु गोपाला रामचंद्रन, डॉ. भीमराव अंबेडकर, राजीव गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण जैसी हस्तियों का देश के प्रति योगदान इनके जीवित रहते हुए तत्कालीन सरकारों की समझ से बाहर रहा लेकिन इनकी मौत के बाद सरकार ने इन्हें भारत रत्न के लायक समझा।

खास बात ये है कि इस सम्मान की स्थापना के वक्त इसमें मरणोपरांत किसी को इस सम्मान से नवाजने का प्रावधान नहीं था लेकिन 1955 में इस प्रावधान को भी इसमें जोड़ दिया गया। जिसके बाद से अब तक 11 लोगों को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया चुका है।

ख़बरों के मुताबिक अब एक बार फिर से भारत रत्न के लिए सरकारी कवायद शुरु हो गई है तो इस पर सियासत गर्माने लगी है। चर्चा में चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हॉकी के जादूगर ध्यानचंद, दलित नेता काशीराम और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम बाहर आने के बाद अब कांग्रेस को लगता है कि इसमें और नामों को जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि ये अलग बात है कि खुद सत्ता में रहते हुए कांग्रेस को इन महापुरुषों को भारत रत्न से नवाजने का कभी ख्याल नहीं आया। (पढ़ें – सचिन भारत रत्न तो ध्यानचंद और अटल क्यों नहीं..?)

मुद्दा ये नहीं है कि यूपीए सरकार में किसे इस सम्मान से नवाजा गया और एनडीए सरकार में किसे..?

मुद्दा ये है कि क्या भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर हो रही सियासत कितनी जायज है..?

ये एक ऐसा सम्मान है जिसे हर भारतीय पाना चाहेगा लेकिन जो लोग इस सम्मान के हकदार हैं, क्या उन्हें नजरअंदाज तो नहीं किया जा रहा और उनकी मौत के बाद उनको सम्मानित किया जा रहा है..?

सवाल ये भी है कि क्यों कुछ लोगों ने देश का प्रधानमंत्री रहते हुए खुद को तो इस सम्मान के लायक समझ लिया लेकिन कई वास्तविक हकदारों को जीते जी इस सम्मान के लायक नहीं समझा गया और मरणोपरांत उनका योगदान नजर आया।  जाहिर है बात जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की ही हो रही है।

फरवरी 2014 में जब क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को इस सम्मान से नवाजा गया तो इसके पीछे की सियासत को आसानी से समझा जा सकता था। सियासत हर पार्टी कर रही है, भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिए जाने की बात कहती रह गई लेकिन यूपीए सरकार ने नहीं दिया, अब मोदी सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती दिख रही है, तो दूसरे नामों को उछालकर कांग्रेस इस पर सियासत कर रही है।

बात भाजपा, कांग्रेस की या फिर अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया जाए या न दिया जाए की नहीं है बल्कि इस पर हो रही सियासत की है और इस सियासत में हर कोई शामिल है। अच्छा होगा कि भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर कम से कम राजनीति न हो और कम से कम इस सम्मान का मान बना रहे।

deepaktiwari555@gmail.com



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
August 12, 2014

दीपक जी एक ही तो रत्न होता है जिसको सत्तारूढ़ पार्टी पैदा कर सकती है सत्ता मैं आओ आप भी अपना भारत ऱत्न पैदा कर लो अपने चांस आने तक ओम शांति शांति जपते रहो 

Rajeev Varshney के द्वारा
August 12, 2014

दीपक जी ये सियासतदान है सियासत इनका काम. यहाँ पुरस्कारों में ही राजनीती नहीं की जाती, खेलों में टीम चुनने तक में राजनीती हो जाती है. भारत रत्न भारत का सर्वोच्च सम्मान है, इसके पात्र को चुनते समय इस बात का ख्याल किया जाना चाहिए की अमुक व्यक्ति के द्वारा किये गए कार्यों से भारत के आम आदमी को क्या लाभ पंहुचा है. मेरी समझ से राजनेताओं को इस पुरस्कार का पात्र बनने पर रोक लगा देनी चाहिए. अच्छी और गंभीर विषय उठाती रचना के लिए बधाई. सादर राजीव वार्ष्णेय

deepak pande के द्वारा
August 12, 2014

SUNDER LEKH AADARNIYA DEEPAK JEE YAHEE CHALTA RAHA TO IS DESH ME IS BHARAT RATN KEE GARIMA DHEERE DHEERE GIRTI JAYEGI

shakuntlamishra के द्वारा
August 11, 2014

बहुत अच्छा कहा है दीपक जी ,सर्वोच्च नागरिक सम्मान में भी राजनीती होती रही है !


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